Friday, April 10, 2009

'चुनाव न लड़ने का फैसला मेरी अन्तरात्मा की आवाज'

नई दिल्ली। एक तरफ एक जूता और दूसरी तरफ कांग्रेस। जूते के आगे पार्टी झुक गई और अपने नेता का टिकट काटना पड़ा। दिखाना पड़ा इंसाफ का रास्ता। लेकिन इंसाफ की दुहाई देने वाले नेता अब गुस्से में हैं। खुद को पाक साफ बताकर इसके लिए मीडिया को बताया जिम्मेदार।
कांग्रेस पार्टी की तरफ से टिकट कटने के बाद जगदीश टाइटलर बौखला गए हैं। उनका कहना है कि IBN7 पर लगातार खबर दिखाए जाने की वजह से ही उनका टिकट कटा है। टाइटलर ये मानने को कतई तैयार नहीं है कि हंगामें के बाद कांग्रेस ने टिकट काटने का फैसला लिया। IBN7 के संवाददाता नीरज गुप्ता के साथ खास बातचीत में टाइटलर ने कहा कि उन्होंने अन्तर्रात्मा की आवाज की वजह से चुनाव न लड़ने का फैसला किया।
टाइटलर की बातों को सुनकर ऐसा लगता है कि रस्सी जल गई पर ऐंठ नहीं गई। जब टाइटलर को खुद को बचाने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है तो सारा मामला उन्होंने मीडिया पर डाल दिया। टाइटलर की बात सुनकर लगता है कि भले ही टिकट कट जाए पर जनता के बीच संदेश ये जाए कि उन्होंने पार्टी की भावनाओं का कद्र किया है, और इसी वजह से उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।
टाइटलर शहीद जैसा भाव लेकर चुनाव से हटना चाह रहे हैं ताकि आगे की राजनीति बची रहे। वह ये मानने को कतई तैयार नहीं है कि पंजाब में जो हंगामा हो रहा था वो लोगों की नाराजगी है। उनका कहना है कि ये सब कुछ साजिश के तहत हुआ है।
जगदीश टाइटलर अब भी मानने को तैयार नहीं हैं कि पार्टी टिकट काटने का मन बनाने लगी थी। वह ये भी मानने को तैयार नहीं है कि पंजाब कांग्रेस आलाकमान को लगातार इसके लिए दबाव बना रही थी। पार्टी लगातार पसोपेश में थी कि टाइटलर का टिकट कैसे काटा जाए।
टाइटलर मानें या न मानें पर ये तय है कि उनकी अंतरात्मा पार्टी के फैसले के बाद ही जागी। जबकि मामला लंबे समय से चल रहा है।

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Saturday, March 28, 2009

84 के सिख दंगों में टाइटलर को मिली क्लीन चिट

नई दिल्ली। सीबीआई ने जगदीश टाइटल 84 दंगों के मामले में क्लीन चिट दे दी है। कड़कड़डूमा को सौंपे रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि जसबीर सिंह भरोसेमंद गवाह नहीं है। सीबीआई ने कोर्ट को पिछली बार सौंपे अपनी रिपोर्ट में कहा कि टाइटलर के खिलाफ उसे कोई सबूत नहीं मिला है। कड़कड़डूमा कोर्ट में थोड़ी देर बाद इस मामले की सुनवाई होगी। पिछली बार सौंपे सील रिपोर्ट कोर्ट को दी। 29 सितंबर 2007 को सीबीआई ने ये रिपोर्ट कड़कड़ूमा कोर्ट में फाइल की थी।
इसी सिलसिले में पहले सीबीआई का कहना था कि एक गवाह है जसबीर सिंह जो मिल नहीं रहा है। उसके बाद आईबीएन 7 उस गवाह के पास पहुंचा था। फिर कोर्ट ने क्लोज़र रिपोर्ट खारिज कर दी। जिसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि दोबरा से इस पूरे मामले में जांच करे। इसके बाद जसवीर समेत 4 गवाहों से बयान लेकर सीबीआई अमेरिका से लौटी। लेकिन इस गवाही को उन्होंने भरोसेमंद नहीं माना।

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वरुण गांधी सलाखों के पीछे, समर्थकों का हंगामा

आईबीएन-7
भाजपा नेता वरुण गांधी को अपने भड़काऊ भाषणों के चलते शनिवार को सलाखों के पीछे भेज दिया गया। यहां स्थानीय अदालात में समर्पण करने के बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भे दिया है। वरुण की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने जेल के बाहर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने 50 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।
भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग भी की। लाठीचार्ज और पथराव में पन्द्रह लोग घायल हुए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्रा ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विपिन कुमार ने वरुण को जेल भेज दिया है। 30 मार्च को मामले की अगली सुनवाई होगी।
इससे पहले सरेंडर करने के लिए वरुण हजारों समर्थकों के साथ अदालत परिसर पहुंचे। आरंभ में मजिस्ट्रेट ने वरुण के वकीलों को बताया कि उनके खिलाफ कोई वारंट नहीं है और यदि वे समर्पण करना चाहते हैं तो उन्हें एक हलफनामा दायर कर उन धाराओं का उल्लेख करना होगा जिनके तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने वरुण को जेल भेजने का आदेश उनके यह कहने के कुछ देर बाद सुनाया कि मैं जेल जाने को तैयार हूं। वरुण ने भड़काऊ भाषण देने से इंकार किया है। जिला प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिये ऐहतियात के तौर पर धारा 144 लागू कर दी थी। सुरक्षा के लिये पीएसी की दो कंपनियां भी तैनात की गई थीं। इसके बावजूद 25 हजार से ज्यादा लोग वरुण के साथ उनके लिए जिंदाबाद के नारे लगाते हुये चल रहे थे।
वरुण ने पीलीभीत में संवाददाताओं से कहा- मैं अपने लोगों, अपने समुदाय और अपने देश में विश्वास जगाने का हरसंभव प्रयास करूंगा। मैं पीछे नहीं हटूंगा। मैं अपने सिद्धांतों की खातिर जेल जाने को तैयार हूं।
गौरतलब है कि भड़काऊ भाषण देने के आरोप में वरुण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और जनप्रतिनिधि कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वरुण को दिल्ली उच्च न्यायालय से 27 मार्च तक के लिए अग्रिम जमानत मिली हुई थी। शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में वरुण के वकील ने उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी वापस ले ली थी। इसके बाद ही तय हो गया था कि वरुण सरेंडर करेंगे।

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Thursday, March 26, 2009

आडवाणी की PM को ललकार, कहा-TV पर आएं बहस के लिए

आईबीएन-7
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लोकसभा चुनाव के पहले अमेरिका की तरह टेलीविजन पर बहस की चुनौती देते हुए उनको फिर देश का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री करार दिया। चीनी सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के कामेंग जिले में एक चुनावी सभा में आडवाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री टेलीविजन पर बहस के लिए आएं। क्या ये बहस होनी चाहिए?

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'आडवाणी का एकमात्र योगदान बाबरी ध्वंस ही है'

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी को 'अवसरवादी' करार देते हुए मंगलवार को कहा कि 'राष्ट्र कल्याण' में उनका एकमात्र योगदान बाबरी मस्जिद विध्वंस में उनकी भूमिका है।
आडवाणी की ओर से लगातार की जा रही कांग्रेस की आलोचना पर टिप्पणी करने के लिए कहे जाने पर प्रधानमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा भाजपा नेता ने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाकर ही प्रमुख भूमिका निभाई थी जिसकी वजह से हिंदू-मुस्लिम हिंसा भड़क उठी थी।
कांग्रेस पार्टी का घोषणापत्र जारी करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में प्रधानमंत्री ने आडवाणी पर निशाना साधते हुए कहा- राष्ट्र कल्याण में उन्होंने क्या योगदान दिया है?
मनमोहन ने कहा- जब वह गृहमंत्री थे, संसद पर आतंकवादी हमला हुआ। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से सीमा पर फौज का बड़ी संख्या में जमावड़ा किया गया।
उन्होंने कहा- बिना किसी नतीजे के हमने सेना को वापस बुला लिया। संसद पर हमला हुआ, लालकिले पर हमला हुआ, इंडियन एयरलाइंस का विमान अगवा हुआ और आतंकवादियों को रिहाकर उन्हें पुरस्कृत किया गया। यह आडवाणी का रिकार्ड है।

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पीएम मनमोहन पहुंचे स्वर्ण मंदिर, टेका मत्था

अमृतसर। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार सुबह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका। उनके साथ उनकी पत्नी गुरशरण कौर भी थीं।
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 24 जनवरी को हुए सफल बाइपास सर्जरी के बाद सिंह स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे।
प्रधानमंत्री ने नीले रंग की जैकेट के साथ कुर्ता-पायजामा पहन रखा था। वह स्वर्ण मंदिर में लगभग आधे घंटे रहे और प्रार्थना सुनी।
प्रधानमंत्री के साथ शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के अध्यक्ष अवतार सिंह भी उपस्थित थे। एम्स में हुई सफल सर्जरी के बाद प्रधानमंत्री की दिल्ली से बाहर यह पहली यात्रा थी।
इस निजी दौरे के दौरान उन्होंने अमृतसर में अपने रिश्तेदारों से भी मुलाकात की।

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पाक में रातोंरात 'कुख्यात' हो गए वरुण गांधी

इस्लामाबाद। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते और पीलीभीत से भाजपा के उम्मीदवार वरुण गांधी की बयानबाजी से जहां भारतीय राजनीति में बवंडर मचा है, वहीं पाकिस्तान के मीडिया में भी इसकी जोर-शोर से चर्चा हो रही है। पाकिस्तान के ब्लॉग भी इसी चर्चा से अटे पड़े हैं। वरुण गांधी अपने इस कारनामे के बाद पाकिस्तान में रातों रात सुर्खियों में आ गए। यह बात अलग है कि लगभग शत प्रतिशत लोगों के मन में इस युवा नेता के प्रति नकारात्मक छवि ही बनी है।
पाकिस्तान में अखबार ‘डॉन’, ‘द न्यूज’ और ‘नेशन’ जैसे अग्रणी अखबारों में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में लिखने वाले वरिष्ठ स्तंभकार रजा रमी ने अपने ब्लॉग ‘जहान-ए-रमी’ और ‘रजा रमी डॉट कॉम’ में वरुण गांधी को ‘सिरफिरा, धर्मांध और कट्टरवादी’ बताते हुए उनके भाषण को मजहबी तथा नफरत फैलाने वाला बताया है। उनके ब्लॉग पर वरुण को नवाजे गए इन ‘तमगों’ को सैकड़ों लोगों ने बिल्कुल जायज ठहराते हुए बेहद कड़ी प्रतिक्रियाएं जाहिर की हैं।

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पंजाब में राजा बनाम बलूंगड़ा

अमित चौधरी
चंडीगढ़। जी हां,इस कहानी में एक राजा है और एक बलूंगड़ा। कहानी पढ़ने से पहले जरूरी होगा कि हम आपको बलूंगड़ा का मतलब बता दें। पंजाबी भाषा में बलूंगड़ा बिल्ली के बच्चे को कहते हैं जिन्हें पने अक्सर कहीं न कहीं नटखट शैतानियां करते हुए देखा होगा।
इस कहानी के असल किरदार हैं पंजाब के मौजूदा उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल और दूसरे किरदार हैं पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और पटियाला के राजा के नाम से मशहूर कैप्टन अमरिंदर सिंह।
सुखबीर और अमरिंदर की लड़ाई किसी से छुपी नहीं है। लेकिन आज कल यह लड़ाई इतनी बढ़ गई है कि दोनों एक दूसरे पर बेहद निजी टिप्पणियां करने से भी बाज नहीं आ रहे। हाल ही में अमरिंदर सिंह ने खन्ना के पास दोराहा में एक चुनावी रैली के दौरान सुखबीर बादल को बलूंगड़ा कह डाला।
यह पहली बार नहीं था जब अमरिंदर सिंह ने इस तरह के टिप्पणी राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के ख़िलाफ़ की हो। इससे पहले भी चाहे सत्ता में रहते हुए या सत्ता से बाहर, जब भी अमरिंदर के सामने सुखबीर बादल का जिक्र हुआ, अमरिंदर ने सुखबीर को बलूंगड़ा कहा।
अमरिंदर का तर्क है कि जब सुखबीर बादल निकर पहन कर स्कूल जाया करते थे तब से वे सक्रिय राजनीति में हैं। लिहाजा सुखबीर की छवि उनके सामने एक बच्चे की तरह है यह बात अलग है कि राजा साहब उन्हें आदमी के बच्चे की संज्ञा नहीं देते।
वैसे सुखबीर बादल भी राजा साहब के साथ दो-दो हाथ करने के मूड में हैं। सुखबीर ज़ख्मी शेर की तरह अमरिंदर से बदला लेने के लिए तड़प रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे यह तो पंजाब में चर्चा-ए-आम है। ख़ास तौर से जब सुखबीर और उनके पिता प्रकाश सिंह बादल को अमरिंदर सिंह ने भ्रष्टाचार के मामले में जेल भिजवाया था तभी से सुखबीर अमरिंदर से अपने और अपने पिताजी की बेईज्ज़ती का बदला लेने के लिए तड़प रहे हैं। और विधानसभा चुनाव अकाली दल और बीजेपी को जितवा कर सुखबीर ने यह साबित भी कर दिया था कि वो अब राजनीति में बच्चे नहीं हैं।
वैसे अक्सर किसी राजा के नाम के साथ जी भी ज़रूर लगाया जाता है। अगर राजा के साथ जी न लगाया जाए तो साफ़ एहसास हो जाता है कि राजा कि इज्ज़त कि जा रही है या बेईज्ज़ती। खैर, यहां इस बात को लाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि जब भी सुखबीर से अमरिंदर सिंह के किसी आरोप के बारे मीडिया उनसे सफाई मांगता है तो अमूमन सुखबीर के मुंह से अमरिंदर सिंह के लिए यही निकलता है...अय्याश राजा।
बहरहाल अमरिंदर सिंह के हाथ में लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान है। अमरिंदर पंजाब में कांग्रेस की चुनाव प्रचार कमिटी के चेयरमैन हैं और अगर अमरिंदर और रनिंदर कानूनी मामलों में विजिलेंस की पेशियां भुगतते रहे तो आने वाले लोकसभा चुनाव में दोनों बाप बेटे का चुनाव प्रचार में जा पाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
इस बीच अमरिंदर सिंह की इन निजी टिप्पणियों से ख़ुद पंजाब के मुख्यमंत्री और सुखबीर बादल के पिता प्रकाश सिंह बादल भी काफी आहात हैं। हाल ही में होशियारपुर में जब बड़े बादल जी से यह पूछा गया कि अमरिंदर उनके बेटे जो अब राज्य के उप मुख्यमंत्री भी हैं उन्हें बलूंगड़ा कह कर पुकारते हैं तो उन्होंने यही कहा कि अमरिंदर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, बड़े नेता भी हैं उन्हें इस तरह की बचकानी हरकत शोभा नहीं देती।

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